Dr. M. Murthi

नमस्ते, समर्पण,समाधान, समायोजन और सामंजस्य किसी भी तंबू के लिए ये चार खंबे आवश्यक होते हैं।दिल से शुक्रिया सुजाता सुहासजी आप दोनो योग सृष्टि के अजूबे हैं।अचंभित कर देनेवाले आपके अभ्यास को देख कर हर कोई कैसे आपके भक्त n बने।दीवार से लेकर जलाशय तक,अंधकार से लेकर प्रकाश तक, कठिन से लेकर सरल तक ,नामुमकिन को मुमकिन कर लेना आपकी पहचान है।आपके अपने आसन,कृति,आपके कौशल को दर्शाते हैं,आपकी मुस्कान आपकी आवाज आपके अंदाज हैं,आपके आगाज और आपकी सुंदर भावना आपके अपनेपन भावात्मक आत्मिक संबंधों की द्योतक है।इन तीन वर्ष की योग यात्रा चारधाम की यात्रा से कम नहीं थी।इस यात्रा को यूं ही चलते रहने दीजिएगा,इन्ही शुभकामनाओं के साथ आप दोनो को शत शत नमन।आज का सेशन बहुत बहुत अच्छा ग्रेसफुल था।मुस्कुराते रहे खुश रहे,दिल से यही दुआ।💐💐💐💐💐👏🏻🥰